यमुना बाई जी का चरित्र और एक बड़ी सीख
पूज्य महाराज जी के श्रीमुख से भक्त-चरित्र — पूरी कथा ऊपर वीडियो में सुनें।
पूरा प्रवचन
साधना जल्दी सिद्ध हो जाए। अपनी तरफ से क्या उपाय करना चाहिए? भगवान का दृढ़ भरोसा। दृढ़ आश्रय साधना सिद्ध होने का उपाय सब दोषों से मुक्त होने का उपाय भगवान का दृढ़ भरोसा। हम वही मुंह की खाते हैं जहां भगवान की आज्ञा का उल्लंघन करते हैं। शास्त्र आज्ञा का उल्लंघन करते हैं। पक्का समझ लो। गुरुदेव भगवान कहते थे चाहे 24 घंटा भजन कर लो अगर एक मिनट भी आज्ञा का उल्लंघन करोगे तो 24 घंटे के भजन का आनंद अनुभव नहीं कर पाओगे बिल्कुल ठीक रखल पे चले जो रकील खींच दी गई वैसे लकीर का फकीर फकीर कौन जो लकीर का फकीर जो गुरु ने लकीर खींच दी कि इस पे चलना है बस इधर नहीं इधर नहीं राई के सम चलत होत और की ओर राई भर पैर उतार दिए लकीर से तो फकीर में अंतर आ जाएगा।
लकीर का फकीर जो गुरु ने शास्त्र ने लकीर खींच दी बस उसी पर चलना है। इधर उधर गाड़ी उतारोगे पलट जाएगी। जो जीटी रोड बना है उसी पर चलो। ये जो संप्रदाय है जो मार्ग है ये जीटी रोड है। राजमार्ग है। इसमें गिरोगे नहीं। अपनी जान में प्रयास में कमी ना रखें। साधना का अभिमान ना रखें और भगवान का भरोसा रखें तो जल्दी साधन सिद्ध हो जाता है। साधन में साधक को मेलजोल बढ़ाना ठीक है कि नहीं? यह हमारे दोस्त हैं। हमारे परमार्थिक अगर हैं भजनंदी है तो कोई दोष नहीं है। अगर थोड़ी भी सांसारिकता उसमें है तो तुम्हें गिरा देगी।
इसलिए दोस्त नहीं बनाना चाहिए। जीवन में दोस्त नहीं बनाया। आज तक अभी कोई दोस्त नहीं। आगे भगवान जाने। आज तक कोई दोस्त नहीं तो दुश्मन का सवाल ही नहीं होता। जब दोस्त हो तो दुश्मन हो ना दोस्त है ना दुश्मन है। भगवान ने बड़ी कृपा की। आज तक एक दोस्त नहीं। एक भी नहीं है। वृंदावन में रहते हुए 27 28 वर्ष हुए जा रहे हैं। एक भी दोस्त नहीं। पीछे तो वैराग्य में जीवन रहा तो वहां दोस्त का सवाल ही नहीं उठता। यहां भी एक भी दोस्त नहीं। कोई सब संत महंतों की चरण रज माथे पे है लेकिन अपना किसी से नहीं कि अमुक आश्रम के अमुक महंत से हमारा प्रेम है।
सबसे प्रेम है। सबकी चरण रज वंदना है लेकिन अपनी दोस्ती किसी से नहीं है। परमार्थ में साधन मार्ग में मेलजोल बिल्कुल ठीक नहीं है। मेलजोल में धोखा हो जाएगा। जमुना बाई यही जुगल घाट पर रहती थी। अजीज वेग अकबर का भांजा वह यहां गस्त पर आया हुआ था। अपने सैनिकों के साथ देखा ब्रह्मचारिणी फटे पुराने कपड़े शरीर पर लपेटे यमुना स्नान करके तेज झलक रहा था। तो सैनिकों से कहा ऐसी सुंदरी तो हमारी सेवा में आनी चाहिए। बोले सरकार ये विरक्त है साधु है ऐसे अब उसका मन ललचा गया देख के गीले वस्त्र में ऐसे दो वैश्याएं भेजी वो साधु के वेश में आई और भगवान की चर्चा कर दी आठ 10 दिन लगातार आई तो उस साधु भाव से सम्मान करके बैठा लेती अब जब 10 दिन लगातार आई तो मेलजोल हो गया हंसना बातचीत करना बैठना वो दो दिन फिर नहीं आई फिर तीसरे दिन अगले दिन आई तो पूछना बनता है ना कि आप दो दिन नहीं आई तो उनका हमारे यहां एक बहुत बड़े साधु आए हैं उनकी सेवा में आप दर्शन करेंगे उनका हरिवंश महाप्रभु की कृपा से ऐसी तो कोई इच्छा है नहीं साधु दर्शन के लिए आप मना करते हैं चलिए ना बहुत अच्छे साधु है आपको आनंद मिलेगा उनका चलो महाप्रभु का आदेश है श्याम श्यामा पद कमल संग सिरनायो किसी भी संप्रदाय का साधु वो अगर सिद्ध है तो उसके दर्शन मात्र से मंगल तो होता ही है।
चलो मेलजोल पहुंचा दिया हवेली में देखा हवेली तो उनका हवेली कहां संत आए हैं तो उनको लगा संत को क्या हवेली और क्या फुटपाथ मान लो कोई धनी मानी बुला के ले आया होगा तो जब हवेली में अंदर गए तो बाहर से वैश्याओं ने दरवाजा बंद कर देखा उस अकबर के भांजे को वो काम की दृष्टि से व्याकुल ऐ अब समझ गई कि मुझे फंसा लिया गया ए नजदीक मत आना। लेकिन वो क्या डरे? शासन सत्ता उसके हाथ में थी जिसके मामा बादशाह हो। बोले तुम्हारे क्या बाप बाबा बादशाह है क्या? तो उसके मामा ही बादशाह थे।
बादशाह का भांजा जो ही आगे बढ़ा तो आंख मूंद लिया और कहा श्री हरिव श्री हरिव श्री हरिव बबर शेर बीच में प्रकट हो गया। दहाड़ मारी उनका पैजामा गीला हो गया। बेहोश हो गए और अंतर् ध्यान ये देखो भागवतिक शक्ति उनको आना नहीं पड़ा दरवाजा नहीं खुलवाना पड़ा अंतर्ध्य होकर अपनी कुटिया में हरिवंश महाप्रभु ने तुरंत उनको कुटिया में और वो जो आंख खुले तो उसे वही शेर दिखाई दे वही तब उसके हृदय में आया कि मैं उनके चलकर चरण वंदना करूं तो आकर चरण मेलजोल ने जुगल घाट से हवेली पहुंचा दिया था हो सकता है जिसे तुम संत संत समझ रहे हो जिसे तुम अपने साध्वी मित्र समझ रहे हो वह तुम्हें गलत जगह फंसा दे इसलिए बिल्कुल किसी से मेलजोल नहीं अपनी नियमावली अपनी दिनचर्या अपने मतलब ना अपने घर किसी को आने देना ना किसी के घर जाना कभी नहीं ये जिंदगी में मत रखना जब ऐसी तेजस्वी यमुना बाई को फंसाकर मेलजोल में हवेली में पहुंचा दिया तो अपने से कितनी बड़ी भी चूक हो सकती है तो मेलजोल साधना में बिल्कुल ठीक ठीक नहीं है।
असंगोम पुरुष मैं असंग हूं। किसी से कोई मतलब नहीं। प्रश्नकर्ता बहुत सुंदर प्रश्न कर रहे। ये हम लोगों की जो चाल है इससे तो लगता है कि पूरी जिंदगी निकल जाएगी। भगवान मिलेंगे नहीं। उत्तर दे रहे हैं। नहीं ऐसा नहीं मानना चाहिए। ऐसा नहीं मानना चाहिए। हमारी चाल तो धीमी है लेकिन हमारे स्वामी की चाल बड़ी तेज है। भगवान की चाल बड़ी तेज है। भगवान गरुड़ से भी तेज चलते हैं। जो सबसे तेज चलने वालों में है वायु। वायु से तेज चलने वालों में है मन। और मन से भी तेज चलने वाले हैं गरुण जी।
और गरुड़ जी से भी तेज चलने वाले श्री भगवान हैं। हमें अपनी चाल पर भरोसा नहीं भगवान पर भरोसा रखना है। ऐसा नहीं मानना कि हमारी चाल से पूरी जिंदगी व्यतीत हो जाएगी। भगवान तो मिलेंगे। नहीं हमारी चाल तो धीमी है लेकिन मेरे मालिक की चाल बहुत जोर की है। जिस दिन कृपा करेगा एक क्षण में हमसे मिल जाएगा। तुम्हें चिंता नहीं करनी मिलने की। तुम्हें चिंतन करना है, नाम जप करना है। जिस दिन नाम की पुकार उनके कान में पड़ेगी, वो एक क्षण में आकर तुम्हें अपना साक्षात्कार करवा देंगे।
इस बात पर विश्वास रखो कि इसी जन्म में भगवत साक्षात्कार होगा। हमारी चाल धीमी है। हम अजीतेंद्रिय है। लेकिन भगवान की कृपा महान है। वो महान हम पर कृपा करके हमसे जरूर मिलेगा। शेष चर्चा की श्री राधा वल्लभ लाल
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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