॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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मुझे हर किसी में भगवान दिखते हैं बहुत डर लगता है, क्या करूं?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

राधे-राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि दंडवत प्रणाम। भगवन मुझे यह जानना है कि मुझे हर किसी में भगवान स्वरूप दिखाई देता है। आप में भी भगवान नजर आते हैं। चींटी में भी हर जगह वही नजर आता है। वो डेली इस्तेमाल करता हूं। जब भगवान नजर आता है तब प्रश्न कौन सा रह गया? वासुदेव सब में नजर आ रहा है। बहु नाम जन्म नावते ज्ञानवान माम प्रपद्यते वासुदेवा महात्मा सुदुर्लभा वो महात्मा सुदुर्लभ जो सर्वत्र भगवान का दर्शन जब भगवान का दर्शन जिसके जान लेने के बाद कुछ जानना बाकी है।

फिर आपका प्रश्न कैसे हो गया? अभी इतना बढ़ गया है कि परेशान हो जाता हूं। डर सा अब ये ले सच्चिदानंद भगवान को देखने में परेशान हो जाते हो। यहां परेशान है देखने के लिए। यही तो अज्ञान यही बच्चा होता है। बिना गुरु की कृपा के बिना सतमार्ग में चले ये स्थिति थोड़ी आती है। अब तुम्हारी बुद्धि ने तुम्हें एक पंडक नाम का राजा था। भागवत में कथा पढ़ लेना और उसको चार उनके काशी मित्र आदि ने सिखा दिया कि तुम्हारा तो अवतार हुआ। तुम भगवान वासुदेव हो। तो लकड़ी की दो भुजाएं लगवा के सुदर्शन चक्र ऐसे बनवा करके वो इसी गर्भ में रहने लगा और भगवान के पास खबर भिजवा दी कि तुम असली भगवान नहीं हो भगवान ने सुदर्शन से उसे काटा तो कुछ ऐसा बुद्धि में भ्रम हो जाता है बच्चा भगवत दर्शन जिसको होने लगते हैं तो उसमें कुछ लक्षण प्रकट होते हैं क्या कौन से लक्षण प्रकट होते हैं निर्माण अमोहा जित संग दोष अध्यात्म नित्या विनिवत्त कामा द्वंद विमुक्त सुख दुख संगै गच्छंत मूढ़ा पदम्यम तत लेकिन आपको तो बिल्कुल उल्टा है आप

कह रहे हो मैं परेशान हो जाता हूं बिल्कुल अभी तुम होश में नहीं डिप्रेशन में पहुंच जाओगे हम जो कह रहे हैं ये गलत आपका सोच है भगवान का जिसको दर्शन होता है पुलकित होकर परमानंद में निवग्न होता है गदगद सुर नैना सजल जिधर देखता है अपना जित देखो तित श्याम खड़े कितना आनंद का विषय हा जाको मनमोहन मन दृष्टि परे सोतो भयो सावन को आंधरो सूझ रंग हरे ही हरे जड़ चैतन्य कछु नहीं देखत जित देखत तित श्याम खड़े बिहल विकल संभार न तन की घूमत नैना रूप भरे करनी अकरनी दो विधि भूले विधि निषेध सब रहे धरे नर हरिदास ते भय बावरे जे यह प्रेम प्रवाह ये तो परमानंद की चरम सीमा है।

बोले बड़ी मुश्किल बड़े परेशानी है। ये शब्द कैसे आ रहे हैं? प्रश्न कैसे आ रहा है? अभी गलत हो बच्चा तू नाम जप करो। सम में भगवान की भावना करने से तो परमानंद की भावना आती है। समस्या क्या होती है? क्या समस्या है? अरे हम कहते हैं सही ढंग से चलो तो वास्तविक भगवान का साक्षात्कार। ये भगवान का साक्षात्कार है। अरे भगवान का साक्षात्कार होने पर ना कोई सोच रह जाती ना कोई चिंता रह जाती है। एक अखंड आनंद जागृत होता है। अभी हमने बताया ना ब्रह्म भूता प्रसन्न आत्मा न सोचति न का हर समय एक अद्भुत आनंद एक अद्भुत समस्या समस्या किस बात की आती है बच्चा?

किस बात की समस्या आती है? डर लगता है महाराज जी अब डर लगता है अरे निर्भय पद का दर्शन करे यही सब उल्टा बातें समझ शरणागति मात्र होने से निर्भय निसंकोच निश्चिंत विपरीत भावना का त्याग संशयों का नाश ये पांच चीजें तत्काल होती है शरणागत होने पर मृत्यु भी उसके लिए महोत्सव होती है जो भगवान की शरण में हो जाता है सर्वत्र भगवान जो देखता है तो मृत्यु में भी भगवान को देखता है सब कुछ हरण करने वालों में मैं मृत्यु हूं वो अपने श्री कृष्ण कृष्ण को देखता है मृत्यु में भी कहां भ अभी इसीलिए

गुरु बिन ज्ञान नहीं होता अगर हम सही सिद्धांत से गुरुजनों के चरणों का आश्रय नहीं लिए तो मनमुखी ज्ञान नहीं होता डर भगवत प्राप्ति में डर अरे डर तो संसार के भोगों में है वहां तो अभय पद है निर्भय पद है सारी चिंताएं सो जा न चाहिए कबहु कछु तुम सन सा सहज सने बसो निरंतर तासुर सो रा निज ये डर कैसा ये प्रश्न कहता है ये शोक कैसा बच्चा भी नहीं ठीक से चलो नाम जप करो और शास्त्रों का स्वाध्याय करो और सत्संग सुनते रहो धीरे-धीरे तब परिपक्व यद्यपि तुम सौभाग्यशाली हो पहले हम तुम्हारी वृत्ति को सही लगाने के लिए डांट रहे यद्यपि तुम सौभाग्यशाली हो किसी भी बहाने से भगवान में चित्त को जोड़ना इस अवस्था में नव यौवन में ये बड़ी कृपा का है क्योंकि इससे असद आचरणों से तो बचोगे ही और सद्भावनाएं बनेगी पर सही ढंग से चलो यह निर्भयता ये निसंकोचता ये निश्चिंतता ये भगवान की शरणागति से जागृत होती है।

आप भयभीत हो। अभी आप में विपरीत भावना है। आप में संशय तो आपकी शरणागति ही नहीं हुई। देखो मेडिकल स्टोर में सब दवाइयां रखी रहती है। बिना डॉक्टर के लोगे तो परेशान हो जाओगे। शास्त्र हमारे मेडिकल स्टोर है और सद्गुरु वैद्य हैं। संत जब जो दवा लिख दें वो मेडिकल स्टोर से ले जाके तो तुम्हें काम। वही शास्त्र का सूत्र तभी हमारे अंदर जागृत होगा। जब हम किसी संत से अपने चित्त को जोड़ देंगे वास्तविक जो भगवत मार्ग के संत हैं तो उनकी कृपा प्रसाद से हर कदम सुखमय होने लगता है।

डर तो कैसी बात करें जो हम 13 वर्ष के थे तब से घर से निकले तो भगवान के सहारे से आज तक इतनी अवस्था हो गई। डर शब्द से हमारा परिचय नहीं हुआ। परिचय नहीं हुआ। जहां तनिक भी संभावना हुई वही हमने देखा आपने भगवान का प्रताप देखा है। डर किस बात का बच्चा? डर भी तो भगवान है। जब सर्वत्र भगवान है तो डर भी भगवान है तो भगवान से भी डर कैसा? अपने भगवान से डर कैसा? बिल्कुल नहीं डर। एक अन्य श्रोता महाराज जी कह रहे हैं वो कह रहे हैं कि मुझे राधा नाम इतनी प्रीति हो गई कि मुझे सब में राधा रानी दिखने लगी है।

लेकिन इसके बाद मुझे भगवत प्राप्ति हो जाएगी। ये बच्चे ये बच्चे ऐसे हैं। अब कैसे अब कैसे सब बच्चे अब ये भी बच्चा है वो भी बच्चा है। राधा राम में इतनी जल्दी इतनी प्रीति हो गई। सब में राधा रानी दिखाते तो आप भगवत प्राप्ति चाहिए महाराज जी आप आप में भी राधा रानी नहीं तो भगवत प्राप्ति अभी किसको चाहिए सब में राधा रानी दिख रही है भगवत प्राप्ति नहीं है महाराज जी हो जाएगा संशय में रहते हां देखो फिर भी अब जैसे इसको बल दिया ऐसे हम आपको कहते हैं आप बहुत सही चल रहे हो सब में राधा रानी की भावना करो नाम जप करो अगर राधा रानी एक बार दिख गई ना अभी तो आप ऐसे एक हमारी श्री जानते हो कितने सुंदर है।

अखिल कोटि ब्रह्मांड नायक मुनि मन मोहन सुमन मन मोहन विश्व मन मोहन उनकी एक झांकी में अपने आप को अधीन कर दिया। देखो माई सुंदरता की सीमा और वैभव जब अनंत ब्रह्मांड नायक उनके सामने हाथ जोड़े खड़े तो उनका अब ऐसे राधा रानी मिल गई राधा रानी श्री जी का दर्शन ब्रह्मेश्वर सुदू पदारविंद श्रीमत पराग परमा वैभवाया सर्वार्थ सार रस कृपा दृष्ट प्यारो क्षमते सुकादम ध्यानगम अरे नाम जप करो नाम जप करो चुप रहो गुप्त हो जाओ सब ठीक हो जाएगा नाम जप जप करो नाम ऐसा मुझे सब में श्री जी देखते बिल्कुल नहीं ऐसी बातें मत करो अभी ऐसी बातें मत करो हम ये कह रहे हैं नहीं तो भक्ति मार्ग बाधित हो जाएगा बाधित हो जाएगा आपको भ्रम हो जाएगा पीतल को कहीं सोना मत समझ लेना जो हरी के सामने वो पीतल पीतल ही रहेगा सोना सोना रहता है भगवत प्राप्ति या भगवत दर्शन होने के स्थितियां होती है ऐसे थोड़ी कि ऐसे भगवत दर्शन हो गया ऐसे सूखे मुंह बोल रहा है मुझे श्री जी मिल स्थिति स्थिति श्री जी के दर्शन के पहले आप स्थिति बदल जाएगी।

आपकी आपकी स्थिति बदल जाएगी। पहले खूब नाम जप करो। पति सेवा करो। परिवार में भगवत भाव रखो। तुम्हें कोई कटु वचन कहे, तुम्हें कोई अपमान करे तो तुम्हें दुख ना पहुंचे। धीरे-धीरे आगे बढ़ो। तब श्री जी करुणा करेंगे। साक्षात्कार हो जाएगा। अब श्री जी दिखाई दे रहे। भगवत प्राप्ति अभी बकाया रह गई। यही सब प्रश्न बच्चों वाले होते हैं। चलो भजन करो आगे। जी।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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