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क्या सिर्फ भारत में ही जन्म लेने से भगवान मिलते हैं?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

वृंदा जी इंग्लैंड से राधे-राधे महाराज जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी इंग्लैंड में रहते हैं ये कह रहे हैं कि पिछले 20 साल से साधन पथ में हैं और पिछले 2 साल से आपको सुन रहे हैं और काफी प्रश्नों के उत्तर इनको आपके माध्यम से मिल जाते हैं और ये निरंतर 84 और भगवत नाम का जप करते हैं। कह रहे इनका प्रश्न है कि भगवत प्राप्ति के लिए वृंदावन में या इंडिया में ही जन्म होना आवश्यक है या जैसे हम बाहर रहते हैं तो किस तरह प्रभु का भजन करें? यहां हम जन्म की बात कभी नहीं बोले।

यहां जन्म हो तो ही भगवत प्राप्ति होगी। ऐसा हां जन्म की महिमा गाई है कि जिनका ब्रज में जन्म हुआ अहो भाग्य है। धन्य भाग है। लेकिन ऐसा नहीं कि कोई भी भगवत प्राप्ति नहीं कर सकता। सबका पुरुष नपुंसक नारिवा जीव चराचर कोई शब्द पर ध्यान दीजिए। जीव चराचर कोई सर्व भाव भज कपट तज मोहि परम प्रिय सोई कहीं का भी हो इंग्लैंड का हो अमेरिका का होलैंड का हो कहीं का भी हो वो हमारे भगवान का भजन करे तो भगवान का प्रिय पुत्र है वो भगवान को प्राप्त कर लेगा सब मम प्रिय सब मम उपजाए पर भगवत प्राप्ति का माहौल जैसा आपको भारत में मिलेगा वैसा विश्व में कहीं नहीं मिलेगा विश्व में भोग विलासिता की प्रधानता है।

आप अन्यत्र देशों में देख लीजिए। अगर आपको कहीं भागवतिक माहौल आपको मिल रहा है विश्व में कहीं भी तो भारतीय जन ही होंगे आसपास। क्योंकि भोग विलासिता को धर्म में बांध करके उसको सीमित करते हुए वैराग्य की भावना में ले जाना ये भारत की पद्धति है और अन्य देशों में विलासिता ही जीवन है। बहुत स्वर्ग नर्क की बात है। लेकिन मोक्ष भगवत प्राप्ति प्रेम परमपद यह चर्चाएं अगर कई बार हैं तो किसी भारत के ब्रह्म ऋषि के द्वारा वह सूत्र दिया गया है। अन्यथा नहीं है। पर कोई अन्यथा भारत के अलावा भगवत प्राप्ति नहीं कर सकता।

ऐसी बात नहीं है। वो हमारे ब्रह्म ऋषियों की शरण में हो। हमारे सिद्धांतों का पालन करे तो भगवत प्राप्ति कर लेगा। हजारों वैष्णव हैं चोटी धोती धारण करके माला नाम जप करते विदेशी। हमसे ज्यादा वैष्णवता धारण करते हैं। पवित्रता तो उनको श्री कृष्ण पक्का मिल जाएंगे। अब हमारे लोग विदेशों की भोग वासना जनित बातें धारण करते हैं तो दुर्गति नहीं होगी। पक्का दुर्गति हो जाएगी। तो हम कहीं भी पैदा हुए हो भगवान की ही भूमि में पैदा हुए हैं। हम कहीं भी रह रहे हो सर्वत्र भगवान है तो हम भगवान के साथ रह रहे हैं।

और हम कोई भी हो हमारे भगवान है क्योंकि सबके भगवान है तो हमारे भी भगवान है। जिस समय हम भगवान का स्मरण करेंगे तो हम जहां होंगे वहां सब कुछ पावन होने लगेगा। भजन से भगवान की प्राप्ति है। अगर भजन ना करो तो वृंदावन में भी सूअर कुत्ता और अन्य जीव है कि नहीं है? तो आप विचार करके देखो भजन नहीं करोगे तो भले माना यही जन्म हो लेकिन इन योनियों में जन्म होगा। जो मनुष्य बनकर भजन करके आनंद है वह अन्य योनियों में आनंद थोड़ी है। वह भूली हुई योनियां है। तो हम कहीं भी रहे भगवान का भजन करें विश्वास करें कि भगवान हमें देख रहे हैं।

भगवान हमारे साथ हैं और हमको निश्चित भगवत प्राप्ति होगी। चाहे अमेरिका में हो, चाहे आईलैंड में हो, कहीं भी हो। हम बिल्कुल सरल भाषा में बता रहे हैं। एक टांग फैलाई तो ब्रह्मलोक तक गए थे कि नहीं? वामना अवतार में। दूसरी टांग में सब भूलोक को नाप लिया। नीचे आताल पाताल सातल तलातल सा बचा कुछ भगवान दूर नहीं है तुम्हारी सोच दूर है उस सोच को नजदीक बना लो कि जहां मैं हूं वहां भगवान है जिस समय में भगवान का चिंतन कर रहे हूं उस समय मैं भगवान में स्थित हूं सबके भगवान है तो मेरे भी भगवान है सर्वत्र भगवान है तो यहां भी इसी समय भगवान है बस हमें आनंद आ जाएगा जरूरी नहीं है कि मतलब हमारा यहां जन्म नहीं हुआ तो हम भगवत प्राप्ति नहीं कर सकते नहीं ऐसा कहीं शास्त्रों में नहीं लिखा।

कोई भी हो चराचर जगत में जो भगवान का भजन करेगा वो भगवान को प्राप्त होगा। समझ पा रहे हो? रूपपाली जी जम्मू से राधे-राधे महाराज जी राधे-राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि दंडवत प्रणाम। महाराज जी इंसान की मृत्यु के उपरांत अक्सर कहा जाता है कि प्रभु ईश्वर राम जी इसकी आत्मा को शांति देना। तो क्या इस तरह से कहने से सचमुच उस जीव को शांति मिलती है? नहीं हम भगवान से प्रार्थना करते हैं। केवल इतना कहने मात्र से नहीं होगा। उसके लिए भगवान ने साधन बताए हैं।

उस ये तो हम सद्भावना प्रकट करते हैं उसके प्रति कि भगवान उसकी आत्मा को शांति दे। पर उसकी आत्मा को शांति तभी मिलेगी यदि हम नाम जप करके उसको दें, उसके लिए धर्मानुष्ठान कराएं, उसके लिए भागवत पाठ कराएं, उसके लिए तीर्थ याटन करें तो उसको शांति प्राप्त हो जाएगी। हमें तो एक सद्भावना हम प्रकट करते हैं। भगवान उसकी आत्मा को शांति दे तो इतने कहने मात्र से नहीं होगी। जैसे कि भगवान इसको भगवत प्राप्ति करा दो तो कहने मात्र से हो जाएगी क्या? उसको साधना करनी पड़ेगी सामने वाले को।

अब वो जीवात्मा तो गया तो उसके निमित्त से हम जैसे अपने धनराशि को किसी के भी नाम ट्रांसफर कर सकते हैं। ऐसे हम अपने भजन को नाम जप किया दो माला 10 माला और भगवान उसकी आत्मा को शांति दे। यह नाम जो अब ये उसके लिए मंगल कार्य हो जाएगा। तो हम जैसे पिंड दान करते हैं उसके लिए गौ दान करते हैं, अन्नदान करते हैं। हम ब्रह्म ऋषियों को संतों को उसके निमित्त भोजन पवाते हैं कि 100 लोग भोजन पाए और इसके बाद इसका फल उस जीवात्मा को प्राप्त निश्चित प्राप्त होगा। क्योंकि आपका किया हुआ कर्म आप चाहे उसको किसी को भी दे सकते हैं।

तो आपने जो दान कर दिया उसके लिए उस जीव का मंगल हो जाएगा। आप समझ पा रहे हैं केवल कहने मात्र से नहीं होगा। जैसे हम आपसे कह दें आपका कल्याण हो जाएगा तो इतने से नहीं हो जाएगा। अगर इतने से होता ना तो कोई भी संत यह नहीं चाहता कि कोई भी दुखी रहे। सब सुखी हो जाए। सबका कल्याण सर्वे भवंत सुखिना सर्वे संत पर इससे हो जाएगा क्या? नहीं हो जाएगा। क्या होगा? संत की बताई हुई साधना से आपका कल्याण हो जाएगा। संत तो चाह रहे हैं सबका कल्याण हो जाए। सब सुखी हो जाए। पर सब सुखी हैं क्या?

सबका कल्याण हो गया क्या? उसी का कल्याण होगा जो उनकी आज्ञा का पालन करके साधना कर रहे हैं। पक्की बात समझना। हमारी सद्भावना है कि सब सुखी हो जाए। पर आप सुखी होना चाहे तब ना आप दुख वाले कार्य करेंगे तो आप दुख भोगेंगे। आप सुख वाले कार्य करेंगे तो आप सुख भोगेंगे। हमारी सद्भावना है क्योंकि हमारा संत स्वभाव है। तो हमारी केवल सद्भावना से काम नहीं चल जाएगा। आपकी भी सद्भावना हमारी सद्भावना का सहयोग करें तब कल्याण हो जाएगा। आप समझ पा रहे हैं?

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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